Breaking News
Home / top / विधानसभा चुनाव नतीजे: कहां चूक गई बीजेपी, महाराष्ट्र में हारे 6 मंत्री, हरियाणा में बहुमत तक नहीं पहुंच पाई पार्टी

विधानसभा चुनाव नतीजे: कहां चूक गई बीजेपी, महाराष्ट्र में हारे 6 मंत्री, हरियाणा में बहुमत तक नहीं पहुंच पाई पार्टी

नई दिल्ली: हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे लगभग साफ हैं. जहां महाराष्ट्र में भाजपा एक बार फिर से सरकार बनाने जा रही है तो वहीं हरियाणा में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहमत नहीं मिला है. हालांकि हरियाणा में अब सारी निगाहें जननायक जनता पार्टी (जजपा) के नेता दुष्यंत चौटाला पर टिकी हैं जिनके पास लगभग 10 विधायक हैं. वैसे सूत्रों के मुताबिक चौटाला की पार्टी मनोहर लाल खट्टर को अपना समर्थन दे सकती है. हालांकि ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा. लेकिन ये नतीजे केंद्र में बैठी भाजपा सरकार के लिए चौंकाने वाले हैं. पूरे चुनाव में बीजेपी नेताओं ने धारा 370 और बालाकोट जैसे मुद्दों जमकर भुनाने की कोशिश की लेकिन ऐसा लग रहा है कि लोगों ने राष्ट्रीय मुद्दों के बजाए क्षेत्रीय मुद्दों को ज्यादा अहमियत दी.

महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना भले ही सरकार बनाने जा रही है, लेकिन साथ लड़ने के बाद भी दोनों पार्टियों की सीटें घट गई हैं. वहीं हरियाणा में बीजेपी को मिलने वाले वोट शेयर में 22 प्रतिशत तक कमी आई है. महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी की ताकत बढ़ी है. वहीं, हरियाणा में भी कांग्रेस ने पिछली बार की अपेक्षा इस बार दोगुनी सीटें हासिल की हैं. पिछली बार कांग्रेस को हरियाणा में मात्र 15 सीट्स मिली थीं, जबकि इस बार 30 से अधिक सीट मिलते दिख रही हैं. हरियाणा में अभी किसी को बहुमत मिलते नहीं दिख रहा है.

भाजपा का मत प्रतिशत 22 प्रतिशत तक गिरा
हरियाणा विधानसभा चुनाव के गुरुवार को आए परिणाम में सत्ताधारी दल भाजपा का मत प्रतिशत 22 प्रतिशत गिर गया है. गौरतलब है कि अप्रैल-मई में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने सभी दस सीटों पर जीत हासिल की थी और उसे 58 प्रतिशत मत मिला था. मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली सरकार के कई मंत्री चुनाव हार गए हैं. ‘अबकी बार 75 पार’ का नारा देने वाली भाजपा 90 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के 46 के आंकड़े से दूर है. निर्वाचन आयोग के ताजा रुझान के मुताबिक भगवा पार्टी 40 सीटों पर या तो जीत रही है या आगे है. भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के विधानसभा चुनाव में 47 सीटें जीती थीं. निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध ताजा सूचना के अनुसार भाजपा को 36.3 प्रतिशत मत मिले हैं. इस विधानसभा चुनाव में पिछले चुनाव से अच्छा प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस को लोकसभा चुनाव के आसपास ही मत प्रतिशत मिला है. कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में 28.42 प्रतिशत मत मिला था जबकि इस विधानसभा चुनाव में उसे कुल मतदान का 28.2 प्रतिशत मिला है. लोकसभा चुनाव के नतीजे के अनुसार भाजपा 79 विधानसभा क्षेत्रों में आगे चल रही थी वहीं अब 38 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है. वहीं दूसरी तरफ लोकसभा चुनाव के परिणामों में कांग्रेस जहाँ केवल 10 सीटों पर आगे थी, आज वह 33 सीटों पर कब्जा जमाती दिख रही है. जननायक जनता पार्टी (जजपा) लोकसभा चुनाव के नतीजे के अनुसार केवल एक सीट पर आगे दिख रही थी लेकिन अब वह पांच सीटें जीत चुकी है और पांच पर आगे चल रही है.

महाराष्ट्र में पिछली बार बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना अलग चुनाव लड़ी थी लेकिन इस बार दोनों ने साथ में मिलकर चुनाव लड़ा. जहां शिवसेना ने पिछली बार 63 सीटें जीती थीं तो वहीं भाजपा ने 122 सीटों पर कब्जा जमाया था. वहीं कांग्रेस को 42 और राकांपा को 41 सीटों पर जीत मिली थीं. लेकिन इस बार के चुनावी नजीते भगवा पार्टी के लिए आंखें खोलने वाले हैं. इस बार 288 सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी 103 तो शिवसेना 58 सीटें जीतती दिख रही है. इस लिहाज से बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को कम से कम 24 सीटों का घाटा होता दिख रहा है.

खुद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चुनावी नतीजों में जीत को देखते हुए कहा कि उनके लिए दो परिणाम चौंकाने वाले हैं. एक तो सतारा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र और दूसरा परली विधानसभा क्षेत्र के उपचुनावों के नतीजे. इन दोनों जगहों पर भाजपा ने अपनी सीटें गंवा दी हैं. इसके अलावा उसके लिए चौंकाने वाली बात ये भी रही कि पार्टी के 6 मंत्री अपनी सीट नहीं बचा पाए. फडणवीस ने कहा, “हमारे 6 मंत्री हार गए हैं, हम कल इन कारणों का पता लगाएंगे. आज का दिन हमारी जीत का जश्न मनाने का है.” देखना दिलचस्प होगा कि दोनों प्रदेश में सीएम किस पार्टी का होता है. जहां हरियाणा में भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं है तो वहीं महाराष्ट्र में सरकार गठन के दौरान अपने सहयोगी दल भाजपा के साथ कड़ा मोलभाव करने के संकेत देते हुए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बृहस्पतिवार को कहा कि यह वक्त सत्ता बंटवारे के लिए ‘‘50:50’’ फॉर्मूले को लागू करने का है.

दोनों पार्टियां आसानी से सरकार बना सकती है जबकि भाजपा अपने दम पर बहुमत के करीब पहुंचने के अपने लक्ष्य से दूर दिखाई दे रही है जिससे शिवसेना की स्थिति मजबूत हो गयी है. पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि कौन-सी पार्टी को मुख्यमंत्री पद मिलेगा, इस पर ठाकरे ने कहा, ‘‘यह वक्त भाजपा को उस फॉर्मूले की याद दिलाने का है जिस पर हम तब राजी हुए थे जब भाजपा प्रमुख अमित शाह मेरे घर आए थे…हम गठबंधन के लिए 50:50 फॉर्मूले पर पहुंचे थे.’’ ठाकरे ने कहा, ‘‘हम भाजपा के मुकाबले कम सीटों पर चुनाव लड़ने पर सहमत हुए लेकिन हर बार भाजपा के लिए गुंजाइश नहीं बनायी जा सकती. मेरी पार्टी को भी आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए.’’ उद्धव ठाकरे के तेवर देखते हुए अब सारी निगाहें पार्टी अध्यक्ष अमित शाह पर टिकी हैं कि क्या वे इस समस्या का तोड़ निकाल पाएंगे या फिर महाराष्ट्र में शिवसेना का मुख्यमंत्री देखने को मिलेगा? देखना दिलचस्प होगा.

About admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *