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बोरवेल में फंसे बच्चे को बचाने के हरसंभव प्रयास किए गए: पलानीस्वामी

चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी ने मंगलवार को कहा कि बोरवेल के भीतर फंसे तीन वर्षीय बच्चे को बचाने की कई बार कोशिश की गयी। विपक्षी द्रमुक ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार ने बच्चे को बचाने के लिए कोई तेजी नहीं दिखाई। पलानीस्वामी ने अधिकारियों से सुनिश्चित करने को कहा है कि बोरवेल खोदने के लिए नियमों का कड़ाई से पालन किए जाएं। बचावकर्मियों ने बच्चे सुजीत विल्सन का शव मंगलवार तड़के निकाला। तिरूचिरापल्ली के नाडुकाटूपट्टी में अपने घर के पास खेलते समय बच्चा बोरवेल के भीतर फंस गया था।

विल्सन की मौत पर शोक प्रकट करते हुए पलानीस्वामी ने कहा कि उन्होंने तीन मंत्रियों और राजस्व प्रशासन आयुक्त जे राधाकृष्णन को बचाव अभियान की निगरानी के लिए तैनात किया था। उन्होंने एक बयान में कहा कि कठोर चट्टान रहने के कारण, विल्सन जहां फंसा हुआ था वहां पास में अलग बोरवेल खोदने में कई मुश्किलें आयीं। तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए दिन-रात अभियान चलाया गया।  मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रक्रिया में आधुनिक उपकरण लगाए गए लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद विल्सन को जिंदा नहीं निकाला जा सका। उन्होंने कहा, ‘‘ बोरवेल खोदने के लिए नियम बने हुए हैं और एक गजट में यह प्रकाशित हो चुका है। मैंने जिला कलेक्टरों को सुनिश्चित करने को कहा है कि नियमों का कड़ाई से पालन हो।’’
पलानीस्वामी ने कहा कि नियम का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार का तेजी नहीं दिखाना (बच्चे की मौत का) कारण है। विल्सन का जहां पर अंतिम संस्कार किया गया, उस जगह पर जाकर द्रमुक अध्यक्ष ने बच्चे को श्रद्धांजलि दी ।  विल्सन के शोकसंतप्त परिवार से मुलाकात के बाद स्टालिन ने कहा कि काश कुछ मंत्री और अधिकारी वैसी ही तत्परता दिखाते जैसा वो टीवी चैनलों पर साक्षात्कार देने के लिए जाते समय करते हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित सरकारी विभागों को कठोर चट्टानों के बारे में पता होना चाहिए था। विल्सन को 36 फुट पर भी बचाया जा सकता था।  उन्होंने कहा, ‘‘घटना के तुरंत बाद एनडीआरएफ और सेना को क्यों नहीं बुलाया गया…मेरा इरादा सरकार की आलोचना का नहीं है लेकिन हम नहीं चाहते कि भविष्य में फिर ऐसी कोई घटना हो।’’

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