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चंद्रयान-2 कहानी का अंत नहीं, विक्रम लैंडर की कार्य योजना पर कर रहे हैं काम : सिवन

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख के. सिवन ने कहा है कि वे विक्रम लैंडर की लैंडिंग के लिए कार्य योजना पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम विक्रम लैंडर की लैंडिंग के लिए प्रौद्योगिकी प्रदर्शित करना चाहते हैं। इसरो के 50 साल पूरे होने के मौके पर सिवन ने आईआईटी दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में यह बात कही। सिवन ने कहा कि आप सभी लोग चंद्रयान-2 मिशन के बारे में जानते हैं।

तकनीकी पक्ष की बात करें तो यह सच है कि हम विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग नहीं करा पाए, लेकिन पूरा सिस्टम चांद की सतह से 300 मीटर दूर तक पूरी तरह काम कर रहा था। हमारे पास बेहद कीमती डेटा उपलब्ध है। मैं भरोसा दिलाता हूं कि भविष्य में इसरो अनुभव और तकनीकी दक्षता के माध्यम से सॉफ्ट लैंडिंग का हरसंभव प्रयास करेगा। चंद्रयान-2 कहानी का अंत नहीं है।

हमारा आदित्य एल 1 सोलर मिशन, ह्यूमन स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम ट्रैक पर है। हम कई एडवांस सैटेलाइट्स को लॉन्च करने वाले हैं। एसएसएलवी दिसंबर-जनवरी में उड़ान भरेगा। 200 टन सेमी-क्रायो इंजन की टेस्टिंग और मोबाइल पर एनएवीआईसी सिग्नल भेजने पर भी जल्दी ही काम शुरू हो जाएगा।

इससे पहले इसरो ने बताया कि चंद्रयान-2 आर्बिटर पर सवार चंद्रमा के वायुमंडलीय संरचना एक्सप्लोरर-2 (चेस-2) पेलोड ने आर्गन-40 का पता लगाया है। चंद्रमा की परिक्रमा कर रहे ऑर्बिटर ने आर्गन-40 का पता लगभग 100 किमी की ऊंचाई से लगाया है। आर्गन-40, नोबल गैस आर्गन का एक आइसोटोप है। आर्गन गैस चंद्रमा के बहिर्मंडल का एक प्रमुख घटक है। प्लेनेटरी वैज्ञानिक चंद्र के चारों तरफ इस पतले गैसीय एनवेलप को लुनर एक्सोस्फीयर कहते हैं। इसके बेहद सूक्ष्म होने के कारण गैस के परमाणु बेहद मुश्किल से एक दूसरे से टकराते हैं।

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