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निर्भया कांड : SC नहीं गए मृत्युदंड का सामना कर रहे मुजरिम, तिहाड़ जेल और दिल्ली सरकार को दिया जवाब

नई दिल्ली। देश-दुनिया को वर्ष 2016 में हिला देने वाले निर्भया गैंगरेप और हत्याकांड के मुजरिमों ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की दरवाजा नहीं खटखटाया। मौत की सजा में कमी या उससे माफी के लिए मुजरिम राष्ट्रपति की देहरी पर जाने की बात से पहले ही इंकार कर चुके हैं। दूसरी ओर पहले से तय और आगे की सोची-समझी विशेष रणनीति के तहत जेल में बंद चार में से तीन मुजरिमों ने सोमवार को दिल्ली सरकार और जेल प्रशासन को उनके नोटिस का जबाब जरूर दाखिल कर दिया।

दिल्ली सरकार और जेल प्रशासन से आरोपियों को मिली जवाब दाखिल करने की प्राप्ति रसीद आईएएनएस के पास उपलब्ध है। इस बात की पुष्टि आईएएनएस से तिहाड़ जेल में बंद दो मुजरिमों (विनय कुमार शर्मा और अक्षय कुमार सिंह) व दिल्ली की मंडोली जेल में बंद पवन कुमार गुप्ता के वकील डॉ. अजय प्रकाश सिंह ने की।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अजय प्रकाश सिंह ने फांसी की सजा का सामना कर रहे जेल में कैद तीनों मुजरिमों द्वारा जेल और दिल्ली सरकार को दिए गए जवाब की प्राप्ति रसीद भी आईएएनएस को मुहैया कराई है, जिन पर तिहाड़ और मंडोली के संबंधित जेल अधीक्षक कार्यालयों की मुहर है।

आईएएनएस के पास तीनों मुजरिमों को 29 अक्टूबर को दिए गए उन नोटिसों की प्रतिलिपि भी मौजूद है, जिनके जरिए जेल प्रशासन ने मुजरिमों को आगाह किया था कि उनके पास सजा माफी के वास्ते दया याचिका के लिए मात्र सात दिन बाकी बचे हैं। वे चाहें तो इन सात दिनों के अंदर सजा माफी के लिए उनके पास बचे इकलौते कानूनी हक का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

राष्ट्रपति के सामने दया याचिका दाखिल करके। इस नोटिस के मिलने के बाद ही तिहाड़ जेल नंबर 2 में बंद निर्भया के हत्यारे विनय कुमार शर्मा और जेल नंबर 4 में बंद अक्षय कुमार सिंह और मंडोली की 14 नंबर जेल में बंद पवन कुमार गुप्ता की नींद उड़ गई थी। शुक्रवार दोपहर बाद तीनों मुजरिमों के वकीलों ने अपने-अपने मुवक्किलों से जेलों में जाकर कई घंटे गहन और गुप्त मंत्रणा भी की।

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