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दिल्ली विधानसभा चुनाव : वायु प्रदूषण बनेगा मुद्दा, भुना सकते हैं कांग्रेस और भाजपा

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) जहां दिल्ली सरकार के पांच साल के काम, जिसमें शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे शामिल हैं, को लेकर जनता के बीच जाने को तैयार है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस को उम्मीद है कि दिल्ली में हवा की गुणवत्ता तेजी से बिगडऩे यानी वायु प्रदूषण का मुद्दा उन्हें सत्ता तक पहुंचा सकता है। दिवाली के बाद शहर में वायु प्रदूषण काफी बढ़ गया है और वातावरण जहरीला हो चुका है।

पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण (ईपीसीए) दिल्ली-एनसीआर में पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर चुका है। इसने एडवाइजरी जारी कर कहा कि लोग खास तौर पर बच्चे और वृद्ध लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकलें। आप सरकार ने एक ओर जहां हवा जहरीली होने के लिए पड़ोसी राज्यों में पराली जलाए जाने को जिम्मेदार ठहराया है, वहीं विपक्ष ने सत्तारूढ़ दल पर वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम न उठाने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस पार्टी की दिल्ली इकाई लोगों को वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए 15 साल के कार्यकाल वाली पिछली शीला दीक्षित के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की याद दिला रही है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने प्रदूषण के लिए केंद्र की भाजपा सरकार और दिल्ली की आप सरकार, दोनों को जिम्मेदार ठहराया है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में वायु प्रदूषण 365 दिनों की समस्या हो गई है और यह अब प्रमुख पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी बन गई है। भाजपा ने भी प्रदूषण को लेकर आप पर निशाना साधा है। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने दावा किया कि केंद्र की भाजपा सरकार ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के निर्माण की व्यवस्था की। उन्होंने कहा, हमने सुनिश्चित किया कि प्रदूषण नियंत्रण में रहे और इसलिए हमने 60,000 कारों को दिल्ली से दूर रखा है।

तिवारी ने कहा, वायु प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि खुली हवा में सांस ले पाना मुश्किल हो गया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री धूल से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने में असफल रहे हैं। निर्माण कार्य और सडक़ों के बनने के चलते प्रदूषण हो रहा है, लेकिन वह लोगों को यह बोलकर गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं कि दूसरे राज्यों में पराली जलाए जाने के चलते प्रदूषण बढ़ा है, वह अपनी नाकामी छिपाने की कोशिशें कर रहे हैं।

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