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अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाने की तैयारी: सीतारमण

नई दिल्ली । वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को यहां कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में हो रहे प्रयास के तहत अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाने की तैयारी चल रही है।

श्रीमती सीतारमण ने राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा आयोजित दो दिवसीय छठी ग्रामीण एवं कृषि वित्त विश्व कांग्रेस के शुभारंभ के मौके पर कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से अब अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाने की तैयारी चल रही है। इसके तहत किसानों को पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा उत्पादक बनाने की योजना है। किसानों की ऐसी भूमि जिस पर खेती नहीं की जा रही है या कृषि योग्य भूमि नहीं है को सौर ऊर्जा या पवन ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। उन्होंने कहा कि इसके लिए नवीनीकरण ऊर्जा मंत्रालय की ओर से सहायता भी दी जा रही है।

पूरी दुनिया के 70 देशों के 200 से अधिक वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुये उन्होंने कहा कि भारत में ग्रामीण क्षेत्रों एवं कृषि क्षेत्र के विकास के लिए बहुत से उपाय किये गये हैं। इसका लाभ अब किसानों को मिलने लगा है। उन्होंने कहा कि किसानों की चिंताओं को दूर करने और ग्रामीण विकास को प्रमुखता दी गयी है क्योंकि अभी भी भारत में अधिकांश लोग ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं और कृषि पर आधारित है। उनके जीवनयापन में सहजता लाने के भी उपाय किये गये हैं। इसके लिए प्रधानमंत्री जनधन योजना, मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना , अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना, प्रधानमंत्री बीमा योजना आदि शुरू की गयी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसान को छह हजार रुपये की वार्षिक आर्थिक सहायता दी जा रही है और कुछ राज्यों ने इसमें अपनी ओर से भी राशि जोड़ी है।

मती सीतारमण ने कहा कि सरकार किसानों को ऑनलाइन लाकर उनके उत्पादों को पूरे देश में बेचने की सुविधा प्रदान कर बेहतर मूल्य दिलाने की कोशिश कर रही है। इसके लिए ई-नाम पाेर्टल शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि अभी भी कुछ राज्यों में कृषि उत्पाद विपणन समिति कार्यरत है लेकिन उनके मंत्रालय ने राज्यों को इन समितियों को समाप्त करने और ईनाम को अपनाने की सलाह दी है।

उन्होंने कहा कि सरकार तटीय क्षेत्र में मत्स्य पालन को बढ़ावा दे रही है। नाबार्ड इस क्षेत्र में पोषक तत्वों के विपणन पर ध्यान केन्द्रित कर सकता है। उन्होंने कहा कि देश में 10 हजार कृषि उत्पाद समितियां बन चुकी हैं और इसके माध्यम से किसानों को स्थानीय स्तर पर बेहतर मूल्य दिलाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि महिला स्वसहायता समूहों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। चालू वित्त वर्ष के बजट में इस तरह के समूह को एक लाख एक लाख रुपये के ऋण दिये जाने का प्रावधान किया गया है।

नाबार्ड के अध्यक्ष हर्ष कुमार भानवाला ने कहा कि भारत में छोटे एवं सीमांत किसानों को प्रति वर्ष 200 अरब डॉलर के कृषि ऋण दिये जा रहे हैं। देश में 10 हजार कृषि उत्पाद समिति बनने के बाद इसमें और तेजी आयेगी। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी का उपयोग कर किसानों को अधिकाधिक लाभ दिलाया जा सकता है तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जीवनयापन को सुगम बनाया जा सकता है।

श्री भानवाला ने कहा कि स्व सहायता समूह और बैंक को जोड़ने के कार्यक्रम से करोड़ों ग्रामीण महिलाओं को लाभ हुआ है और अब शीघ्र ही इसके लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया जायेगा। इससे महिला स्व सहायता समूहों को वित्त उपलब्ध कराने में क्रांतिकारी बदलाव आयेगा।

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