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‘चिदंबरम ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया’, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने साधा निशाना

नई दिल्ली:  बीजेपी नेता प्रकाश जावडे़कर ने पी. चिदंबरम की पत्रकारों से बातचीत पर निशाना साधते हुए कहा, चिदंबरम ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया. प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, पी. चिदंबरम जी ने पहले ही दिन अपनी जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है. अदालत ने उन्हें जमानत के लिए एक शर्त के रूप में केस से संबंधित मामले में कोई सार्वजनिक बयान नहीं देने को कहा था, लेकिन चिदंबरम जी ने आज कहा कि एक मंत्री के रूप में उनका रिकॉर्ड बहुत स्पष्ट था.

इससे पहले पी. चिदंबरम ने कहा, बिना आरोप के नेताओं को हिरासत में लिया जा रहा है. कश्‍मीर (Jammu and Kashmir) में लोगों की आजादी छीन ली गई. अर्थव्‍यवस्‍था पर सरकार सक्षम नहीं है. पी. चिदंबरम बोले, मैं उन नेताओं के बारे में विशेष रूप से चिंतित हूं, जिन्हें बिना किसी आरोप के हिरासत में लिया जा रहा है. अगर हमें अपनी स्वतंत्रता को संरक्षित रखना है तो पहले उनकी स्वतंत्रता के लिए हमें एकजुट होकर लड़ना चाहिए.

 

पी चिदंबरम बोले, कल रात 8 बजे मैंने आजादी और खुली हवा में सांस ली. बाहर निकलते ही मैंने सबसे पहले कश्मीर घाटी के 75 लाख लोगों के बारे में सोचा और उनके लिए प्रार्थना की, जिन्हें 4 अगस्त, 2019 से अपनी बुनियादी स्वतंत्रता से वंचित कर दिया गया है. पी चिदंबरम ने यह भी कहा, अर्थव्‍यवस्‍था पर सुस्‍ती के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्‍पी असामान्य है. उन्होंने अपने मंत्रियों को खुला छोड़ दिया है कि वे लोगों को झांसे पर झांसा देते रहें. सच बात तो यह है कि सरकार अर्थव्यवस्था की ‘अक्षम प्रबंधक’बन गई है.

पी. चिदंबरम ने कहा विकास दर का आंकड़ा यदि 5% को छूता है, तो हम बहुत भाग्यशाली होंगे. कृपया डॉ. अरविंद सुब्रमण्यम की सतर्कता को याद करें इस सरकार में विकास दर 5% जो वास्तव में 5% नहीं है, बल्‍कि 1.5% से भी कम है. विकास दर की सरकार की पद्धति संदिग्‍ध है.

पी चिदंबरम ने कहा, सरकार गलत है क्योंकि यह विचारशून्य है. बर्बादी के कारणों को खोजने में असमर्थ है, क्योंकि यह पीएमओ के नोटबंदी, जीएसटी, टैक्‍स टेररिज्‍म, रेगुलेटरी ओवरकिल, संरक्षणवाद और केंद्रीकृत नियंत्रण जैसी अपनी गलतियों का बचाव करने की जिद में लगी हुई है. उन्‍होंने मोदी सरकार पर चुटकी लेते हुए कहा, इलाज सबसे शुरुआती उपाय है. यदि इलाज गलत है, तो नुस्खा बेकार होने के साथ घातक भी हो सकता है. वित्तीय वर्ष में 7 माह बीतने पर भी बीजेपी सरकार का मानना ​​है कि अर्थव्यवस्था के सामने जो समस्याएं हैं, वे चक्रीय हैं.

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