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नागरिकता संशोधन बिलः अमित शाह ने कांग्रेस को इन 5 बातों से किया बेनकाब

नई दिल्ली :  भारी हंगामे के बीच सोमवार को लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश किया. बिल के पेश होते ही कांग्रेस ने सरकार पर इस बिल को लेकर कई आरोप लगाए. कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने इस बिल को अल्पसंख्यकों के खिलाफ बताया. करीब एक घंटे तक इस बात पर तीखी नोकझोंक हुई कि इस बिल को सदन में पेश किया जा सकता है या नहीं. बाद में इस बिल के पेश करने के तरीके को लेकर वोटिंग भी कई जिसमें सरकार के पक्ष में 293 वोट पड़े.

1. धार्मिक आधार पर हुआ देश का विभाजन
अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए बंटवारे का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस देश का विभाजन धर्म के आधार पर किया गया. उसके लिए कांग्रेस जिम्मेदार है. कांग्रेस ने अगर धर्म के आधार पर देश का विभाजन नहीं किया होता तो आज यह नहीं होता. पड़ोसी देशों में मुसलमानों के खिलाफ धार्मिक प्रताड़ना नहीं होती है, इसलिए इस बिल का लाभ उन्हें नहीं मिलेगा.

2. बांग्लादेश के लोगों को नागरिकता दी तो पाकिस्तान को क्यों नहीं?
अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमल बोलते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के फैसलों की याद दिलाई. उन्होंने कांग्रेस से सवाल पूछा कि 1971 में इंदिरा गांधी ने निर्णय किया था कि बांग्लादेश से जितने लोग आए हैं, सारे लोगों को नागरिकता दी जाए, तो फिर पाकिस्तान से आए लोगों को क्यों नहीं दिया गया? उन्होंने कहा कि सदन के नियम 72(1) के हिसाब से यह बिल किसी भी आर्टिकल का उल्लंघन नहीं करता है.

3. युगांडा के लोगों को नागरिकता तो इंग्लैंड को क्यों नहीं?
अमित शाह ने कांग्रेस से सवाल किया कि उन्होंने सवाल किया कि जब आर्टिकल 14 ही था तो फिर बांग्लादेश ही क्यों? आज भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को चुन-चुन कर मारा जा रहा है. उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि युगांडा से आए सारे लोगों को कांग्रेस के शासन में नागरिकता दी गई, तब इंग्लैंड से आए लोगों को क्यों नहीं दिया गया? फिर दंडकारण्य कानून लाकर नागरिकता दी गई. इसके बाद राजीव गांधी ने असम अकॉर्ड किया.

4. अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकार तो समानता कैसे?
अमित शाह ने कहा कि दुनियाभर के देश अलग-अलग आधार पर नागरिकता देते हैं. हर देश तार्किक वर्गीकरण के आधार पर ही नागरिकता देते हैं. जब कोई देश कहता है कि ग्रीन कार्ड उस देश में निवेश करने वाले लोगों को मिलेगा. ऐसे लोगों को नागरिकता मिलेगी जो उसके देश में निवेस करे तो क्या वहां समानता का संरक्षण हो पाता है? अमित शाह ने कांग्रेस से सवाल पूछते हुए कहा कि अगर अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकार हैं तो वह समानता का अधिकार कैसे है.

5. नेहरू लियाकत समझौते का नहीं हुआ पालन
अमित शाह ने कहा कि 1950 में नेहरू-लियाकत समझौता हुआ. इसमें दोनों देशों ने तय किया था वह अपने यहां अल्पसंख्यकों के संरक्षण देंगे.
भारत में तो इसका गंभीरता से पालन हुआ, लेकिन पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की क्या हालत है वह पूरी दुनिया जानती है. भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख ईसाई, इन सभी धर्मावलंबियों के खिलाफ धार्मिक प्रताड़ना हुई है.

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