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राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश, चिदंबरम ने कहा- सुप्रीम कोर्ट में गिर जाएगा ये कानून

लोकसभा से पारित होने के बाद नागरिकता संशोधन बिल आज यानी बुधवार को राज्यसभा में पेश कर दिया गया। गृहमंत्री अमित शाह ने इस विधेयक को पेश किया। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल इस विधेयक को संविधान के खिलाफ बताते हुए विरोध कर रहे हैं। जहां बिल पास होने को लेकर सरकार आश्वस्त दिख रही है तो वहीं विपक्ष की कोशिश है कि बिल राज्यसभा में पास न हो पाए। बिल पर चर्चा के लिए 6 घंटे का समय तय किया गया है। हालांकि इस बिल को लेकर राज्यसभा में शिवसेना का रुख बहुत ही दिलचस्प होगा। क्योंकि, राज्यसभा में बिल पेश होने से पहले शिवसेना में अलग सुर दिखे।

भारतीय मुस्लिम भारतीय थे, हैं और रहेंगे: शाह

गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को नागरिकता संशोधन विधेयक चर्चा एवं पारित करने के लिए राज्यसभा में पेश करते हुए कहा कि भारत के मुसलमान भारतीय नागरिक थे, हैं और बने रहेंगे।

पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के गैर मुस्लिम प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने के प्रावधान वाले इस विधेयक को पेश करते हुए उच्च सदन में गृह मंत्री ने कहा कि इन तीनों देशों में अल्पसंख्यकों के पास समान अधिकार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इन देशों में अल्पसंख्यकों की आबादी कम से कम 20 फीसदी कम हुई है। इसकी वजह उनका सफाया, भारत प्रवास तथा अन्य हैं।

शाह ने कहा कि इन प्रवासियों के पास रोजगार और शिक्षा के अधिकार नहीं थे। शाह ने कहा कि विधेयक में उत्पीड़न का शिकार हुए अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है।अमित शाह ने कहा कि इस सदन के सामने एक ऐतिहासिक बिल लेकर आया हूं। इस बिल के जो प्रावधान हैं उससे लाखों-करोड़ों लोगों को फायदा होगा। अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश में जो अल्पसंख्यक रहते थे, उनके अधिकारों की सुरक्षा नहीं होती थी उन्हें वहां पर समानता का अधिकार नहीं मिला था। जो अल्पसंख्यक धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत में आए। उन्हें यहां पर सुविधा नहीं मिली। इस बिल के जरिए हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध, ईसाई, पारसी शरणार्थियों को रियातत मिलेगी।

चिदंबरम ने कहा- सुप्रीम कोर्ट में गिर जाएगा ये कानून

कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कहा, “सरकार जो विधेयक ला रही है, ये पूरी तरह से गैर-संवैधानिक है। हमारी जिम्मेदारी बनती है कि वही पास करें जो सही हो, अगर यदि गैर-संवैधानिक बिल को हम पास करते हैं तो बाद में सुप्रीम कोर्ट इस बिल का भविष्य तय करेगी। पी. चिदंबरम बोले कि मुझे पूरा विश्वास है कि ये बिल अदालत में नहीं टिकेगा। पी. चिदंबरम ने कहा कि ये बिल अनुच्छेद 14 की बातों का उल्लंघन करता है, जिसमें समानता का अधिकार शामिल है। इसमें जो कानूनी कमियां हैं, उसका जवाब कौन देगा और जिम्मेदारी कौन लेगा। यदि कानून मंत्रालय ने इस बिल की सलाह दी है तो गृह मंत्री को कागज रखने चाहिए, जिसने भी इस बिल की सलाह दी है उसे संसद में लाना चाहिए. 1. आपने तीन देशों को ही क्यों चुना, बाकी को क्यों छोड़ा? 2. आपने 6 धर्मों को ही क्यों चुना? 3. सिर्फ ईसाई को क्यों शामिल किया? 4. भूटान के ईसाई, श्रीलंका के हिंदुओं को क्यों बाहर रखा?

गृह मंत्री ने जो आश्वासन दिया है, हम चाहते हैं कि उसे पूरा किया जाए: बीपीएफ

बीपीएफ के बिश्वजीत दैमारी ने कहा कि ये बिल कई तरह की शंकाएं पैदा करता है, शंका है कि अगर ये आया तो काफी कुछ बर्बाद हो जाएगा। लेकिन गृह मंत्री ने जो आश्वासन दिया है, हम चाहते हैं कि उसे पूरा किया जाए। पूर्वोत्तर के स्थानीय लोगों के लिए 80 फीसदी से अधिक हक रखा जाएगा। उन्होंने इस बिल का समर्थन किया।

मनोनीत सांसद स्वपन दास गुप्ता ने कहा कि सभी को शरणार्थी और घुसपैठियों में अंतर करना होगा, सिर्फ अफवाह फैलाना ठीक नहीं होगा। ये बिल कुछ गलत नहीं करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करता है। ये बिल बांग्लादेश से आए बंगाली हिंदुओं को उनका अधिकार देता है।

सरकार जिन्ना का ख्वाब पूरा करना करने जा रही है: सपा सांसद

समाजवादी पार्टी नेता जावेद अली खान ने कहा कि हमारे देश का बंटवारा हुआ था। टू नेशन थिअरी। सावरकर मानते होंगे हिंदू एक राष्ट्र है। जिन्ना मानते होंगे, मुस्लिम एक राष्ट्र हैं। लेकिन मैं पूरे होशोहवास के साथ कह रहा हूं कि मैं नहीं मानता कि राष्ट्र धर्म के आधार पर बन सकता है। हिंदू राष्ट्र का मतलब क्या? इस्लामी राष्ट्र का मतलब क्या? कि जो हम आए दिन सुनते हैं भाषणों में कि हम हिंदुस्तान को मुस्लिम मुक्त बनाएंगे। कई लोग तो तारीख तक बता देते हैं। इस्लामी राष्ट्र का क्या मतलब था कि पाकिस्तान हिंदू मुक्त होगा। जो ख्वाब जिन्ना का 1947 में बंटवारे के वक्त पूरा नहीं हो पाया कि पाकिस्तान हिंदू मुक्त हो और भारत मुस्लिम मुक्त हो, एनआरसी और सीएबी आने के बाद हमारी सरकार जिन्ना का ख्वाब पूरा करना करने जा रही है।

जदयू ने किया बिल का समर्थन

जद(यू) सांसद रामचंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि इस बिल को लेकर अफवाह फैलाई जा रही है। विपक्ष की ओर से डराया जा रहा है। इस बिल में संविधान का उल्लंघन नहीं हुआ है, ना ही अनुच्छेद 14 का उल्लंघन हुआ है। जदयू ने राज्यसभा में इस विधेयक का समर्थन किया है। जदयू सांसद ने कहा कि हमारा देश रिपब्लिक है, यहां के नागरिकों को समान अधिकार है। हमारे देश में सीजेआई, राष्ट्रपति भी अल्पसंख्यक समाज से हुए हैं लेकिन क्या पड़ोसी मुल्क में ऐसा हुआ क्या। यहां एनआरसी की बात हो रही है लेकिन C के आगे D भी होता है, हमारे लिए D का मतलब डेवलेपमेंट है। यह बिल सबको समान अधिकार देने के लिए है।

बिल संविधान के खिलाफ, इस बिल को लेकर जल्दबाजी क्योंकांग्रेस

कांग्रेस की ओर से आनंद शर्मा ने कहा कि पहले और अब के बिल में काफी अंतर है, सबसे बात करने का जो दावा किया जा रहा है उससे मैं सहमत नहीं हूं। इतिहास इसको कैसे देखेगा, उसे वक्त बताएगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि इस बिल को लेकर जल्दबाजी क्यों हो रही है, संसदीय कमेटी के पास इसे भेजा जाता और तब लाया जाता। आनंद शर्मा ने कहा कि 72 साल में ऐसा पहली बार हुआ है, ये विरोध के लायक ही है। ये बिल संवैधानिक, नैतिक आधार पर गलत है, ये बिल प्रस्तावना के खिलाफ है। ये बिल लोगों को बांटने वाला है। हिंदुस्तान की आजादी के बाद देश का बंटवारा हुआ था, तब संविधान सभा ने नागरिकता पर व्यापक चर्चा हुई थी। बंटवारे की पीड़ा पूरे देश को थी, जिन्होंने इसपर चर्चा की उन्हें इसके बारे में पता था। आनंद शर्मा बोले कि ये बिल संविधान निर्माताओं पर सवाल उठाता है, क्या उन्हें इसके बारे में समझ नहीं थी। भारत के संविधान में किसी के साथ भेदभाव नहीं हुआ, बंटवारे के बाद जो लोग यहां पर आए उन्हें सम्मान मिला है। पाकिस्तान से आए दो नेता प्रधानमंत्री भी बने हैं। कांग्रेस नेता बोले कि टू नेशन थ्योरी कांग्रेस पार्टी ने नहीं दी थी, वो सावरकर ने हिंदू महासभा की बैठक में दी थी। आनंद शर्मा ने कहा कि गृह मंत्री ने बंटवारे का आरोप उन कांग्रेसी नेताओं पर लगाया जिन्होंने जेल में वक्त गुजारा, ये राजनीति बंद होनी चाहिए। आनंद शर्मा बोले कि कांग्रेस ने टू नेशन थ्योरी का विरोध किया था, उसे बैन भी कर दिया गया था। हिंदू महासभा, मुस्लिम लीग ने दो देशों की थ्योरी का समर्थन दिया, हिंदुस्तान का बंटवारा अंग्रेजों की वजह से हुआ कांग्रेस नहीं। नया इतिहास मत लीखिए।

सुप्रीम कोर्ट में भी बिल पर संग्राम होगा: डेरेक ओ ब्रायन

राज्यसभा में टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि इस विधेयक पर संसद में संग्राम होगा लेकिन उसके बाद ये बिल सुप्रीम कोर्ट में भी जाएगा। उन्होंने इस दौरान कहा कि ये बिल भारत विरोधी, बंगाल विरोधी है। डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि भाजपा की नींव तीन बातों पर है सिर्फ झूठ, झांसा और जुमला। आप घुसपैठियों पर अधिकार छीनने का आरोप लगाते हैं लेकिन आपकी सरकार ने 2 करोड़ लोगों का रोजगार छीन लिया। जो देश में है, उनका आप ध्यान रख नहीं सकते हैं और बाहरी लोगों की बात कर रहे हैं। एजेंसियों के जो आंकड़े हैं उनके अनुसार सिर्फ 31 हजार की शरणार्थी हैं, इसपर अमित शाह ने उन्हें टोका तो डेरेके ओ ब्रायन ने कहा कि मैं सही होऊंगा, इसलिए गृह मंत्री टोक रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने नोटबंदी, अर्थव्यवस्था, कश्मीर की बात की लेकिन हर बार सरकार ने वादा तोड़ा है। सरकार को वादा तोड़ने में महारत हासिल है।

राजनीति छोड़देशहित के बारे में सोचे कांग्रेसजेपी नड्डा

जेपी नड्डा ने कहा कि आजादी के बाद पाकिस्तान में लगातार अल्पसंख्यकों की संख्या घटी है जबकि भारत में अल्पसंख्यकों की संख्या बढ़ी है। उन्होंने कहा कि कई बार कुछ लोग समझना नहीं चाहते हैं, विपक्ष ऐसा ही कर रहा है। अनुच्छेद14 को बार-बार उठाया जा रहा है, जो कि गलत तर्क है। कांग्रेस पार्टी को राजनीति नहीं बल्कि देशहित के बारे में सोचना चाहिए। आज देश के कई हिस्सों में ऐसे शरणार्थी हैं, जो पढ़ाई कर चुके हैं लेकिन नागरिकता की वजह से उन्हें नौकरी नहीं मिल रही है। जेपी नड्डा ने कहा कि मनमोहन सिंह की बात आप मानतें है, 18 दिसंबर 2003 में मनमोहन सिंह ने राज्यसभा में बयान दिया था। मनमोहन सिंह तब अफगानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ अत्याचार हो रहा है। हम मनमोहन सिंह की बात ही मान रहे हैं, जो आप नहीं कर पाए।

 भाजपा के पास अकेले बहुमत नहीं

गौरतलब है कि राज्यसभा में बिल पास करवाने को लेकर भाजपा के पास अकेले बहुमत नहीं है। ऐसे में भाजपा को सहयोगी पार्टियों की जरूरत होगी। बिल पास करवाने और राज्यसभा में तय मानक से कम सदस्य होने के कारण बीजेपी ने राज्यसभा सासंदों के लिए व्हिप जारी कर दिया है। वहीं शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि इस बिल पर हमारी शंकाओं को दूर करना होगा, अगर हमें संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो हमारा रुख लोकसभा में हमने जो किया उससे अलग हो सकता है।

पीएम ने बिल को लेकर दिया निर्देश, विपक्ष पर निशाना

नागरिकता संशोधन बिल को लेकर आज बीजेपी संसदीय दल की बैठक हुई। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों को बिल को देशहित में बताया और निर्देश दिया कि नागरिकता बिल को लेकर सांसद अपने स्तर पर जागरूकता फैलाएं। बिल लोकसभा से पास हो चुका है और राज्यसभा से भी इसके पास होने की उम्मीद जताई जा रही है।

मीटिंग में प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि बिल पर कुछ विपक्षी दल पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं। बीजेपी सांसदों को प्रधानमंत्री मोदी ने निर्देश दिया कि वह जनता तक यह संदेश पहुंचाए कि बिल पूरी तरह से देशहित में है। इससे पड़ोसी मुल्क के पीड़ित अल्पसंख्यकों को न्याय मिलेगा। यह एक ऐतिहासिक कानून साबित होगा।

बिल पर समर्थन को लेकर क्या बोले थे उद्धव ठाकरे

राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल पर समर्थन को लेकर शिवसेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को कहा था कि शिवसेना तब तक बिल का समर्थन नहीं करेगी, जब तक कि पार्टी की ओर से लोकसभा में उठाए गए सवालों का जवाब नहीं मिल जाता।

राज्यसभा का गणित

अभी राज्यसभा में सांसदों की कुल संख्या 240 है यानि बिल पास करवाने के लिए 121 सांसदों का समर्थन चाहिए। एनडीए के पास 116 सांसदों का समर्थन है। बीजेडी के 7 सांसद बिल के समर्थन में वोट करेंगे। वाईएसआर कांग्रेस के 2 सांसद भी बिल का समर्थन कर सकते हैं यानी एनडीए को 125 सांसदों का समर्थन मिलता दिख रहा है।

जबकि  उद्धव ठाकरे ने राज्यसभा में समर्थन के लिए नए इशारे किए हैं। वहीं टीआरएस के 6 सांसद बिल के विरोध में वोट करेंगे।

लोकसभा में पास हो चुका है बिल

बता दें कि देर रात सोमवार को लोकसभा से नागरिकता संशोधन बिल को पास कर दिया गया था। भारी हंगामे और मतविभाजन के बाद इस बिल के पक्ष में जहां 311 वोट पड़े थे तो वहीं विपक्ष में 80 सांसदों ने मतदान किया था।

कांग्रेस करेगी धरना प्रदर्शन

वहीं कांग्रेस ने नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ बुधवार को सभी प्रदेश मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों एवं विधायक दल के नेताओं को पत्र लिखकर इस धरना-प्रदर्शन के बारे में सूचित किया है।

पूर्वोत्तर में जारी है विरोध प्रदर्शन

लोकसभा में पारित विवादास्पद नागरिकता (संशोधन) विधेयक के खिलाफ छात्र संघों और वाम-लोकतांत्रिक संगठनों ने मंगलवार को पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किया। राज्यसभा में इस विधेयक को पेश किए जाने से एक दिन पहले असम में इस विधेयक के खिलाफ दो छात्र संगठनों के राज्यव्यापी बंद के आह्वान के बाद ब्रह्मपुत्र घाटी में जनजीवन ठप रहा।

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