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भागवत बोले, जनसंख्या नियंत्रण कानून देश की जरूरत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जनसंख्या नियंत्रण कानून की वकालत करते हुये कहा कि संघ के एजेंडे में इस विषय को शामिल किया जा चुका है हालांकि इस बारे में फैसला केन्द्र सरकार को लेना है।

भागवत ने गुरुवार शाम जिज्ञासा समाधान सत्र में स्वयं सेवकों ने उनसे राम मंदिर, सीएए, जनसंख्या नियंत्रण कानून और मथुरा काशी के मुद्दे पर संघ की भूमिका पर सवाल किए जिसका उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया।

संघ प्रमुख ने कहा कि जनसंख्या वृद्धि विकराल रूप धारण कर चुकी है। इस मुद्दे पर संघ का रुख हमेशा दो बच्चों के कानून के पक्ष में रहा हालांकि यह जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है।

सरकार को ऐसा कोई कानून बनाना चाहिए जिससे जनसंख्या नियंत्रण हो सके।

नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के बाद उपजी स्थिति पर आए सवाल पर उन्होंने कहा कि यह कानून देश हित में है, लेकिन कुछ लोग विरोध कर रहे। धारा 370 हटाने के बाद देश में उत्साह और आत्मविश्वास बना। इसके बाद सीएए अस्तित्व में आया जिसका विरोध शुरू हुआ। इसके बारे में भ्रमित लोगों को वास्तविकता से रू-ब-रू कराना चाहिए। यह सबका दायित्व बनता है। लोगों की भ्रांतियां दूर की जानी चाहिए। इस मामले में पीछे हटने का प्रश्न ही नहीं है।

उन्होंने कहा कि चाहे अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला हो या फिर नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लागू करने का, इन सभी पर संघ पूरी तरह सरकार के फैसले के साथ खड़ा है। उन्होंने स्वयंसेवकों से कहा कि वह जागरूकता अभियान चलाकर इसके लिए लोगों को जागरूक करें।

राममंदिर का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट से हल हो चुका है, अब इसमें संघ की क्या भूमिका होगी के उत्तर में भागवत ने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट निर्माण होते ही संघ का काम पूरा हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि संघ की भूमिका इस प्रकरण में सिर्फ ट्रस्ट निर्माण होने तक ही है। इसके बाद संघ खुद को इससे अलग कर लेगा। एक प्रश्न के उत्तर में संघ प्रमुख ने कहा कि काशी-मथुरा संघ के एजेंडे में न तो कभी थे और न ही कभी होंगे।

जिज्ञासा सत्र में संघ की क्षेत्रीय कार्यकारिणी के चुनिंदा 40 पदाधिकारी उपस्थित थे।

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