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जानिए कौन हैं रामचंद्र गुहा, जिन्होंने राहुल गांधी पर साधा निशाना

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचक माने जाने वाले मशूहर इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने शुक्रवार को केरल साहित्यिक समारोह (केएलएफ) के दूसरे दिन ‘देशभक्ति बनाम अंध राष्ट्रवाद’ विषय पर बोलते हुए कहा कि भारतीय राजनीति में ‘परिश्रमी व आत्मनिर्भर’ नरेंद्र मोदी के सामने ‘पांचवी पीढ़ी के वंशज’ राहुल गांधी के लिए कोई मौका नहीं है। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। 61 वर्षीय गुहा ने कहा कि मैं निजी तौर पर राहुल गांधी के खिलाफ नहीं हूं। वह एक भले और अच्छे संस्कार वाले आदमी हैं। लेकिन युवा भारत पांचवी पीढ़ी के वंशवादी को नहीं चाहता। यदि आप मलयाली 2024 में भी राहुल गांधी को दोबारा चुनने की गलती करोगे तो आप महज नरेंद्र मोदी को ही लाभ पहुंचाओगे।

कौन हैं रामचंद्र गुहा…

बंगलूरू में रहने वाले रामचंद्र गुहा एक प्रसिद्ध इतिहासकार और जीवनी लेखक हैं। उनकी लिखी गई किताबों में पर्यावरणीय इतिहास पर लिखी गई ‘द अनक्वाइट वुड्स’ (कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय प्रेस, 1989) को अग्रणी माना जाता है। गुहा ने सामाजिक क्रिकेट के इतिहास पर एक पुरस्कार विजेता किताब लिखी है जिसका नाम ‘ए कॉर्नर ऑफ ए फॉरेन फील्ड’ (पीकाडॉर, 2002) है, इसे ब्रिटिश मीडिया हाउस ‘दि गॉर्जियन’ द्वारा क्रिकेट पर लिखी गई दस सबसे बेहतरीन किताबों में शामिल किया जाता है।
रामचंद्र गुहा द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर लिखी गई किताब ‘गांधी’ (मैकमिलन / एक्को प्रेस, 2007; संशोधित संस्करण, 2017) को अंग्रेजी अखबार ‘दि इकोनॉमिस्ट’, ‘दि वॉशिंगटन पोस्ट’ और ‘वॉल स्ट्रीट जरनल’ द्वारा साल की सबसे बेहतरीन किताब के तौर पर चुना गया। वहीं, इस किताब को ‘टाइम्स ऑफ लंदन’ और ‘दि हिंदू’ ने दशक की सबसे बेहतरीन किताब के रूप में शामिल किया है। रामचंद्र गुहा का सबसे हालिया काम महात्मा गांधी की दो खंड की जीवनी है। जिसमें पहले खंड ‘गांधी बिफोर इंडिया’ (नोफ, 2014) को ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ और ‘सैन फ्रांसिस्को क्रॉनिकल’ द्वारा वर्ष की उल्लेखनीय पुस्तक के रूप में चुना गया था। वहीं, दूसरे खंड ‘गांधी: द इयर्स द चेंज द वर्ल्ड’ (नोफ, 2018) को ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ और ‘दि इकोनॉमिस्ट’ द्वारा वर्ष की उल्लेखनीय पुस्तक के रूप में चुना गया। इसके अलावा इन्होंने कई प्रसिद्ध किताबें लिखी हैं जिनमें भारत गांधी के बाद, भारत नेहरू के बाद आदि प्रमुख हैं।

विवादों से रहा है पुराना नाता

रामचंद्र गुहा का विवादों से भी पुराना नाता रहा है। साल 2018 में गुहा ने ट्विटर पर एक पोस्ट शेयर किया। उन्होंने तस्वीर को ट्वीट करते हुए लिखा था, ‘मैंने अपने दोपहर के भोजन की फोटो को गोवा में डिलीट कर दिया क्योंकि खाने का स्वाद खराब था। हालांकि मैं बीफ के मामले में भाजपा के पूर्ण पाखंड को फिर से उजागर करना चाहता हूं, और मैं अपनी धारणा को फिर से दोहराना चाहता हूं किइंसानों के पास होना चाहिए खाने, कपड़े पहनने और प्यार में पड़ने का अधिकार।

उनकी इस तस्वीर के बाद जमकर बवाल हुआ था। गुहा का कहना था कि किस तरह भाजपा के लोग देश में बीफ के नाम पर लोगों को मार रहे हैं और उनके द्वारा शासित राज्य में इस पर प्रतिबंध नहीं है। हाल ही में नागरिकता कानून को लेकर बंगलूरू में प्रदर्शन के दौरान इतिहासकार गुहा को हिरासत में लिया गया था।

इन पुरस्कारों से गुहा को किया गया है सम्मानित

रामचंद्र गुहा को दिए गए पुरस्कारों में अमेरिकन सोसायटी ऑफ एनवायर्नमेंटल हिस्ट्री द्वारा दिए जाने वाला ‘लियोपॉल्ड-हिल्डी पुरस्कार’, ‘डेली टेलीग्राफ’ का ‘क्रिकेट सोसायटी पुरस्कार’, सामाजिक विज्ञान अनुसंधान में उत्कृष्टता के लिए ‘मैल्कम अदिदेशिय पुरस्कार’, पत्रकारिता में उत्कृष्टता के लिए टरामनाथ गोयनका पुरस्कारट, ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ और एशियाई अध्ययन में योगदान के लिए ‘फुकुओका पुरस्कार’ शामिल हैं।

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