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शारजील इमाम बिहार के जहानाबाद से गिरफ्तार, राजद्रोह का है आरोप

दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम ने बिहार के जहानाबाद से जेएनयू के छात्र शारजील इमाम को गिरफ्तार कर लिया है। शारजील इमाम पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया था। एंटी-सीएए प्रोटेस्ट के दौरान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और फिर दिल्ली के शाहीनबाग में दिए गए उनके भाषणों की क्लीपिंग सामने आने के बाद छह राज्यों में उसके खिलाफ राजद्रोह के केस दायर हो चुके हैं। ये राज्य हैं बिहार, असम, अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और मणिपुर। शारजील इमाम मूल रूप से बिहार के जहानाबाद जिले के काको का रहने वाला है। चुनावी माहौल में इमाम की गिरफ्तारी ने राजनीति को भी तेज कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी जहां पहले से ही उनके बयान को देश तोड़ने वाला बता रही है, वही अब बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने भी उनके बयान की निंदा कर डाली है। देखना यह  है कि दिल्ली पुलिस कोर्ट में शारजील के खिलाफ किस तरह के ठोस सबूत पेश करती है। जिससे उनके खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा चलाया जा सके।

नीतीश कुमार ने भी दी प्रतिक्रिया

क्राइम ब्रांच के डिप्टी कमिश्नर राजेश देव ने कहा, हमने जहानाबाद से शारजील इमाम को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बिहार के निवासी इमाम का पता लगाने के लिए पांच टीमों को तैनात किया था। मुंबई, पटना और दिल्ली में छापे भी मारे गए थे। इस गिरफ्तारी के बाद अब इस पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी बयान दिया है। उन्होंने कहा कि विरोध एक बात है, लेकिन कोई भी देश को तोड़ने वाली बात नहीं कर सकता।

भाई को भी हिरासत में लिया गया

मंगलवार को भी जहानाबाद में छापा मारा गया था, हालांकि शारजील इमाम उस वक्त नहीं मिला। उसके भाई को हिरासत में लिया गया वहीं शारजील इमाम की मां अफशान रहीम सामने आई हैं और उन्होंने बेटे को निर्दोष बताया है। मां का कहना है कि शारजील इमाम के बयानों को गलत मतलब निकाला गया। उन्होंने पुलिस और राज्य सरकार पर परिवार को परेशान करने का आरोप भी लगाया।

यह था वो बयान

शाहीन बाग में हो रहे प्रदर्शन के दौरान शरजील इमाम के भाषण का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस वीडियो में शरजील इमाम कहता है, ‘हमारे पास संगठित लोग हों तो हम असम से हिंदुस्तान को हमेशा के लिए अलग कर सकते हैं। परमानेंटली नहीं तो एक-दो महीने के लिए असम को हिंदुस्तान से कट कर ही सकते हैं। रेलवे ट्रैक पर इतना मलबा डालो कि उनको एक महीना हटाने में लगेगा…जाना हो तो जाएं एयरफोर्स से। असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है।

चाचा ने भी दी सफाई

वहीं उनके चाचा अरशद इमाम का यह भी कहना है कि शरजील ने अलीगढ़ में सीएए और एनआरसी के खिलाफ आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया था तथा जेएनयू का छात्र होने के नाते भाषण दिया था, लेकिन वह भड़काऊ नहीं था। यदि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों को अपराधी माना जाता है तो वह भी अपराधी हैं। शरजील के पिता अकबर इमाम 2005 में जहानाबाद विधानसभा क्षेत्र से जदयू के टिकट पर चुनाव लड़े थे। हालांकि, वह हार गए थे। कुछ साल पहले उनका निधन भी हो गया था। छोटा भाई मुजम्मिल इमाम एक राजनीतिक दल से जुड़ा है।

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